Kashmir Ka Swarnim Sasmaran

Shehjar e-magazine Shehjar Online

कश्मीर का स्वर्णिम संस्मरण

जया सिबू रैना

यही है संस्मरण---,
मेरा मातृ-स्मरण
मात्र स्मरण
बस केवल कश्मीर का संस्मरण

सदा याद आते हैं

नित्यता में नूतन चिन्तन
अभिनवगुप्त और वसुगुप्त
दर्शन का मंथन
आचार्य क्षेमराज क्षेमेन्द्र

कल्हण और बिल्हण
मम्मट और जयट्ट-----
किन किन को गिनाये और

एक एक से है बनी हुयी शृंखला---
जिस में कश्मीर की लौघाक्ष मुनि की
परम्परा योग्य प्रेरणा
है वैदिकीय - कृत्ति की अवधारणा

चिन्त्तन और दर्शन
मनन शक्ति तथा अनुशीलन
संस्कृति और कला कौशल

उनकी लेखनी से ही सुशोभित हुये है
जिनका करते हैं अध्य्यन हम
नित्य पहचान बताने के लिये
संस्कारित करने के लिये

कि हम कौन है----
क्या थे अरे! क्या हो सकते हैं
विश्व में

योग दान विश्व अभ्योदय के लिये--
यदि ललद्यद के लल्ल वाख को ही ले
तो विश्व दर्शन का अद्भुत् चिन्तन

बता सकते है----
पिरो सकते हैं
विश्व कल्यान के लिये
इक चिन्तन की माला गुन्थन में

विश्व शान्ति के लिये बस एक समर्पण।
संस्कृति में अपनी नव पौद को अवश्य
अणुप्राणित करना है विस्थापन में
संस्कारो को सुदृढ बनाना
नही रुकना
मूल तत्वों को उजागर करना


यही है श्रीभट्ट की अवधारणा
कवि परमानद की स्मार्त्त साधना
क्षेमेन्द्र का काव्यात्मक मंथन
ये ही मेरा नम्र निवेदन

रूपाभवानी की समुचे चिन्तन की देन
एकता का दर्शन पाना होगा
अपने ही पूर्वजों की सीख का
संरक्षक बनना होगा

आर्य परंपरा का
शैव और शाक्त अनुसंधान का
दर्शन के काव्यात्मक अभिप्राय का
शैव और शाक्त अनुसंधान का

कविता का सार भी सारांश भी
कश्मीर का स्वर्णिम संस्मरण भी

Jaya Sibu writes in Hindi and Kashmiri. She is the recipient of Bhagwan Gopinath Research Fellowship. Some of her Kashmiri poems have been translated by Amrita Pritam in Hindi. Her publication includes 'Mantrik Bhajan Dipika' in Kashmiri verse based on the Kashmiri Beej Mantras of the Shaktivad tradition. 'Bhagwan Gopinath evam Dharmik Chintan' in Hindi is under publication. She is a regular contributor to various Hindi and Kashmiri magazines and piublications.

Copyrights © 2007 Shehjar online and KashmirGroup.com . Any content, including but not limited to text, software, music, sound, photographs, video, graphics or other material contained may not be modified, copied, reproduced, republished, uploaded, posted, or distributed in any form or context without written permission. Terms & Conditions.
The views expressed are solely the author's and not necessarily the views of Shehjar or its owners. Content and posts from such authors are provided "AS IS", with no warranties, and confer no rights. The material and information provided iare for general information only and should not, in any respect, be relied on as professional advice. Neither Shehjar.kashmirgroup.com nor kashmirgroup.com represent or endorse the accuracy or reliability of any advice, opinion, statement, or other information displayed, uploaded, or distributed through the Service by any user, information provider or any other person or entity. You acknowledge that any reliance upon any such opinion, advice, statement, memorandum, or information shall be at your sole risk.
Comments
Kashmir ka 'Swarnim Sansmaran' what a beautiful expression. Thanks Jayaji for your beautiful presentation in Hindi.
Added By Deepak Ganju
Ka kahai Jayaji ka. Man mai uter jati he tasveer aaisi, Mano ki khud he ho vaha. Ishwar aap ki Lekhni ko Aamlijama pahnade.
Added By Ashwani wanganeo
This poem needs to be transcreated in Kashmiri as well,by you.
Added By Dr Chaman Lal Raina
ADVERTIZE HERE