My Mother

Shehjar Online
" सुनिए और सुनाइये "

Raj Dulari Bhat (Bahenji)
Mother”, the word itself has such a special meaning for me. My mother is one of 7 siblings born in the 1930's in a small village called Gairoo, a couple of miles from Awantipura in Kashmir. She is the eldest daughter, who was given the responsibilities of taking care of family at a very young age and hence she matured very fast. She was and still is very fond of learning and enjoyed her schooling till 8th grade which was quite an accomplishment for a girl in that era. If she could, she would have pursued her studies further, but a girl was not encouraged to go for higher studies, so my mother reluctantly had to put a stop to her further education. That did not stop her from learning. Whenever I meet her I am very interested in hearing about her childhood days and she has a lot of stories to share with me and I am taken back in time and enjoy it.

She was very interested in politics. One of her uncles (Pt. Kashyap Bandhu) was an active member in politics and worked closely with Sheikh Abdullah. He was a member of Sanatam Dharam and had many political figures visit him. My mother was close to her uncle and would spent a lot of time listening to his conversations with his political guests. She had that thirst for knowledge and learning. I remember when we were in school she would be interested in reading our books and till recently when she had a chance to meet her grandkids (my children) I could still see that same passion of learning in her. I can only imagine where she would have been professionally if only she was given a chance....
She got married at a very young age of 15, which was very common that time. My father, who was a doctor by profession, was working for J&K Govt and was transferred every few years and my mother had a chance to visit and live in such places like Sopore, Srinagar, Verinaag, Door, Poonch, Rajouri, Doda and Jammu to name a few.

Besides her passion for knowledge and learning, she is an intelligent, kind-hearted soul who is very friendly, giving, with positive outlook, has determination to try new things and is adventure seeking. I admire her for all these qualities and for dedicating her life taking care of her family first as a child, then as a wife and mother and then as a grandmother. She continues to do whatever she can to keep all those traits going. My mother is like a solid pillar to me who inspires me everyday.

For the past few years my mother has shown interest in writing and that gives her joy. It is my honor and pleasure to share with you a few of my mother's writings. If you like you can send your comments to Shehjar.

Enjoy and thank you!



"मेरी माँ (म्येन मआज)”

माँ, यह शब्द ही मेरे लिए ख़ास मायने रखता है I मेरी माँ सात भाई बहनों में सबसे बड़ी बेटी हैंI उनका जनम १९३५ में गेरू में, जो कि कश्मीर में अवन्तीपूरा से २-३ मील की दूरी पर है, हुआ था I चूंकि वह सबसे बड़ी बेटी थी, इसलिए घर की ज़िम्मेदारी का काम उनके कंधो पर बहुत छोटी उम्र से ही पड़ा I उन्होने बहुत जल्द घर के काम-काज, छोटों और बड़ों की देखबाल करना सीख लिया I घर के काम-काज के साथ उन्हें पढ़ाई का बहुत शौक था और उन्होने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की, जो कि उस ज़माने में एक लड़की के लिए सिद्धि थी I यदि उनके बस में होता तो उन्होनें बहुत आगे तक पढ़ाई जारी की होती परन्तु उस ज़माने में एक लड़की को ऊंची पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित नही किया जाता था, इसलिए मेरी माँ को अनिच्छा से आठवीं के बाद स्कूल जाना बंद करना पड़ा I परन्तु उन्होने सीखना बंद नहीं कियाI मैं जब भी उनसे मिलती हूँ मैं उनके बचपन की कहानियाँ सुनने की बहुत उत्सुक होती हूँ I उनके पास कहानियों के बंडार हैं जो वह मुझे सुनाती हैं और मैं उनका बहुत आनंद लेती हूँ I

उनको राजनीति मैं बहुत रूचि थी I उनके ताया जी (कश्यप बंधू जी ) राजनीति के सक्रिय सदस्य थे और उन्होने शेख अब्दुल्लाह और उनकी पार्टी के साथ काम कियाI वह सनातन धर्म को मानते थे और उनके घर बहुत राजनीतिक आंकड़े मिलने आते थेI मेरी माँ अपने ताया जी की लाड़ली थी और वह उनकी मीटिंग्स मैं बहुत रूचि रखती थीI वह हर किस्म का ज्ञान प्राप्त करना चाहती थीI मुझे याद है जब हम स्कूल जाते थे वह हमारे साथ सीखना चाहती थी और वही सीखने की रूचि मैं अभी भी उन में पाती हूँ जब वह मेरे बच्चों से मिलती हैं I यदि उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का मौका दिया गया होता, मुझे पूरा भरोसा है कि वह कोई बड़ी हस्ती बन गयी होती I परन्तु मेरे लिए वह एक महान हस्ती हैं क्योंकि उन्होने अपना किरदार बहुत खूबी से निभाया और उन्हें कोई शिकवा नहीं है I

उनकी शादी बहुत छोटी उम्र में हुई जब वह १५ साल की थी जैसे उस समय की वही रीत थीI मेरे पिताजी डॉक्टर थे और वह जम्मू कश्मीर सरकार के लिए काम करते थेI उन्हें मेरी माँ के साथ बहुत जगहे जैसे सोपोर, श्रीनगर, वेरीनाग, डूर, पूँछ , राजौरी, जम्मू , डोडा आदि-आदि देखने को मिलीI

मेरी माँ बुद्धिमान, दयालू और मिलनसार हैं जिनका सकारात्मक दृष्टिकोण है और जो नई चीज़े करने से कतराती नहीं हैंI मैं उनकी इन गुणो के लिए प्रशंसा करती हूँ और उन्होने कैसे पहले एक बच्ची के रूप मैं , फिर एक बीवी और माँ बनकर अपने परिवारों का बहुत खूबी से ख्याल रखाI आज भी वह दादी-नानी बनकर अपनी क्षमता से वह किरदार बड़ी खूबी से निभा रही हैंI मेरी माँ मेरे लिए एक ऐसा प्रेरणास्रोत हैं जिनसे मुझे हर दिन प्रेरणा मिलती है I

पिछले कुछ सालों से मेरी माँ ने लिखने मैं रूचि ली है और यह इनके लिए आनंदमय हैI यह मेरे लिए सम्मान और खुशी की बात है कि मैं आपके साथ उनके कुछ लिखे हुए गद्य और छंद बाँट रही हूँI कृपया इन्हे पढ़े और अगर आप चाहे तो अपने कमेंट शेह्जार में भेज सकते हैंI

धन्यवाद !


"गद्य और छंद”

1. झूठ से जो पाता है वह पाना नहीं खोना है
और सत्य से जो खोता है वह खोना नहीं पाना है

2. विश्वास और प्रेम में एक समानता है. दोनों में से किसी को भी ज़बरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता

3. अगर दो लोगो में कभी लड़ाई न हो तो समज लेना चाहिए कि रिश्ता दिल से नहीं, दिमाग से निभाया जा रहा है

4. जो जुकता है वह सारी दुनिया को जुका सकता है

5. कोई इतना अमीर नहीं होता है कि वह अपना गुज़रा हुआ कल खरीद सके और कोई इतना गरीब नहीं होता कि वह अपना आने वाला कल न बदल सके

6. बोलने से पहले लफ्ज़ इंसान के गुलाम होते हैं, लेकिन बोलने के बाद इंसान अपने लफ्ज़ो का गुलाम बन जाता है

7. आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालो के लिए सबसे बड़ी सजा है

8. एक साल में ५० दोस्त बनाना आम बात है, ५० साल तक एक ही दोस्त से दोस्ती निभाना ख़ास बात है

9. बातें झोंकों के साथ हवा में जल्द फैल जाती हैं, ज़रा संभल के बोलो, बातें लौटती हैं तो रूप बदल कर आती हैं

10. जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं, वह पूरी दुनिया जीत सकते हैं

11. जीवन भर का साथ, जनम-जनम का साथ
ताउम्र एक-दूसरे का साथ
देते हुए सुख-दुःख बाटने का एहसास
और वृद्ध अवस्था की ढलती शाम
सुकून भर दो, वृद्ध पति-पत्नी का एक साथ रहने का विश्वास
इससे अधिक और क्या सुख चाहिए वृद्ध अवस्था में

12. केवल कर्महीन ही ऐसे होते हैं जो भाग्य को कोसते हैं और जिनके पास शिकायतों का बाहुल्य होता है
होसला कम न होगा तेरा तूफानो के सामने
मेहनत को इबादत में बदल कर तो देखो
खुदबखुद हल होगी ज़िन्दगी की मुश्किलें
बस ख़ामोशी को सवालो में बदल कर देखो

13. इस तरह से जीवन जीना चाहिए कि अगर कोई तुम्हारे बारे में बुरा कहे तो कोई भी उस पर विश्वास न करे

14. कोई भी गलती आप ज़िन्दगी में दो बार नहीं कर सकते
क्योंकि यदि आप उसे दोहराते हैं, तो वह गलती नहीं आप की इच्छा है

15. हर समय के मूल में ही समाधान छिपा होता है
लेकिन हर समस्या हम खुद उत्त्पन करते हैं और समाधान कहीं ओर तलाशते रहते हैं

16. सभ्यता का स्वरुप है सादगी
अपने लिए कठोरता और दूसरों के लिए उदारता
ज़िन्दगी के सफर में दोस्त बनाते रहिये
कभी उनकी सुने, कभी अपनी सुनाते रहे
हंसते रहे सदा आप हम सब के बीच में
जैसे फूल खिलते हैं बहारो के बीच में

I'd like to thank Mr. Arun Koul on behalf of my mother and myself, for fulfilling her deep desire to share her few verses with you all. It would not have been possible without his stepping up and helping me out and giving me the assurance of making it happen...So, thank you Arunji from the bottom of my heart...
Comments
Great, thank you for your effort!
Added By Raj Ambardar
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